
हास्य के कीर्ति-स्तंभ कवि ओम प्रकाश आदित्य जी के कलम से:
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सौरभ सुमन-अनामिका अम्बर का पुनीत गठ-बन्धन।
गंध-पुष्प का मिलन, मिले रोली से जैसे चन्दन।
छंद और कविता के स्वर का सदा रहे लय-संगम।
जीवन के सितार से गुंजित, रहे सर्वप्रिय सरगम।
रहे बसंत सदा पग-पग पर, पल-पल यूं मुस्काये।
जैसे कृष्ण बांसुरी की धुन पे , राधा का ह्रदय रिझाये।
आजीवन इनकी सांसो मे हो योवन स्पंदन।
इनके स्वर के इस बन्धन का, है शत-शत अभिनन्दन।
सोने से दिन हों इनके, चांदी जैसी राते।
सौ बसंत तक रहे देखते, नित नूतन बरसाते।
सौरभ सुरभित रहे, स्वस्ति-मय अनामिका कल्याणी।
महावीर भगवान की घर-आँगन मे गूंजे वाणी।
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-ओम प्रकाश आदित्य.
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