
काव्य-मंचो पर अपने गीतों के माध्यम से आकाश को छूने वाले डॉ विष्णु सक्सेना द्वारा:
परिणय की बगिया सजी, खिले सुमन चहु ओर।
'सौरभ' संग 'अनामिका', बंधे प्रेम की डोर।।
एक कविता मे आग है, एक कविता मे पीर।
एक दूजे के प्यार से, सवरेगी तकदीर॥
कर्तव्यों की तूलिका, जीवन का कैनवास।
इनके आँगन मे सदा, उड़ती राहे सुवास॥
इन दोनों के शीश पर, रख दें अपना हाथ।
आकर इनको भेंट दें, बस इतनी सौगात॥
-डॉ विष्णु सक्सेना
परिणय की बगिया सजी, खिले सुमन चहु ओर।
'सौरभ' संग 'अनामिका', बंधे प्रेम की डोर।।
एक कविता मे आग है, एक कविता मे पीर।
एक दूजे के प्यार से, सवरेगी तकदीर॥
कर्तव्यों की तूलिका, जीवन का कैनवास।
इनके आँगन मे सदा, उड़ती राहे सुवास॥
इन दोनों के शीश पर, रख दें अपना हाथ।
आकर इनको भेंट दें, बस इतनी सौगात॥
-डॉ विष्णु सक्सेना
1 comment:
Dr Sahab ke dwara bahut hi khubsurat badhaiya ......
jaisi unki kavitai hoti hai..........
Post a Comment